मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली पीठ ने लिखा कि IEEPA में “टैरिफ” शब्द को राष्ट्रपति को सीमाहीन अधिकार देने के लिए स्पष्ट रूप से नहीं जोड़ा गया है, इसलिए ट्रंप प्रशासन का यह कदम संविधान के अंतर्गत नहीं आता। न्यायालय ने कहा कि कार्यपालिका और विधायिका की शक्तियों को अलग-अलग रखना संविधान की मूल भावना है।
न्यायालय के फैसले पर ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी कि यह निर्णय “भारी निराशाजनक” है और उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ वैकल्पिक कानूनी मार्ग खोजेंगे तथा नए 10 % ग्लोबल टैरिफ लगाने की बात कही है।
यह फैसला अमेरिका में व्यापक व्यापार नीति और कार्यपालिका की सीमाओं को लेकर एक बड़ा मौलिक निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि इससे राष्ट्रपति के अकेले निर्णय से लागू आर्थिक नीतियों पर न्यायपालिका का नियंत्रण स्पष्ट तौर पर सामने आया है।
क्या अमेरिकी कोर्ट राष्ट्रपति को सजा सुना सकता है ?
संविधान के अनुसार नहीं - अगर कोई राष्ट्रपति अभी भी पद पर है, तो उसके अधिकारिक (ओफिशियल) कार्यों के लिए उसे आपराधिक (क्रिमिनल) सजा नहीं दी जा सकती (उसे प्रेसिडेंशियल इम्यूनिटी मिली होती है)। ऐसा 2024 के एक सुप्रीम कोर्ट निर्णय (Trump v. United States) में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता; लेकिन निजी या व्यक्तिगत कार्यों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।
यदि कोई राष्ट्रपति अपनी सार्वजनिक पद से हट चुका है, तो उसे सामान्य नागरिकों की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे सजा भी हो सकती है, जब तक वह उन अपराधों के लिए ज़िम्मेदार पाया जाए जो निजी कार्यों से जुड़े हों।
तथ्य जांच:
✔ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के व्यापक ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया।
✔ 6-3 के फैसले में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं था।
✔ ट्रंप ने फैसले को निराशाजनक बताया और नए क़ानूनी रास्ते खोजने की बात कही।
✔ अमेरिकी संविधान के अनुसार सिर्फ कांग्रेशन को टैक्स और शुल्क लगाने का अधिकार है।
✔ अगर कोई राष्ट्रपति अधिकारिक कार्य के बाहर अपराध करता है और पद छोड़ चुका है, तो उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
