हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कमला नेहरू अस्पताल (KNH) को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में शिफ्ट करने के फैसले को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
BJP नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कविंदर गुप्ता से मुलाकात कर इस फैसले के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इसे “अव्यवहारिक और जनता विरोधी” बताया और तुरंत रोक लगाने की मांग की।
BJP का कहना है कि IGMC पहले से ही क्षमता से ज्यादा मरीजों का बोझ झेल रहा है, ऐसे में वहां एक और बड़ी सुविधा जोड़ने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि कमला नेहरू अस्पताल करीब 100 साल पुराना मातृ-शिशु अस्पताल है और इसे शिफ्ट करने से महिलाओं और नवजात बच्चों की सेवाओं पर असर पड़ेगा।
इसके अलावा BJP ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस फैसले में पारदर्शिता की कमी है और इसे “साइलेंट शिफ्टिंग” के जरिए लागू किया जा रहा है।
फीस बढ़ोतरी पर भी विरोध
अस्पताल विवाद के साथ-साथ BJP ने शिमला में रोड पास फीस बढ़ाने के फैसले का भी विरोध किया।
- पास फीस ₹2000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई
- प्रोसेसिंग फीस भी कई गुना बढ़ाई गई
पार्टी का कहना है कि यह बढ़ोतरी आम जनता, व्यापारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी।
आंदोलन की चेतावनी
BJP ने राज्यपाल से दोनों फैसलों पर हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो राज्यभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस मुद्दे पर महिला संगठनों और अन्य समूहों ने भी विरोध जताया है, जिससे यह मामला अब राजनीतिक के साथ-साथ सामाजिक मुद्दा भी बन गया है।
तथ्य जाँच (मुख्य बिंदु)
- मुद्दा: कमला नेहरू अस्पताल को IGMC शिफ्ट करने का प्रस्ताव।
- विरोध: BJP ने राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
- मुख्य चिंता: IGMC पहले से ओवरलोड, सेवाएं प्रभावित होने का खतरा।
- अस्पताल महत्व: 100+ साल पुराना मातृ-शिशु अस्पताल।
- आरोप: “साइलेंट शिफ्टिंग” और बिना योजना के निर्णय।
- फीस विवाद: रोड पास फीस ₹2000 से ₹10,000 तक बढ़ी।
- प्रभाव: आम जनता, व्यापारी और मरीज प्रभावित हो सकते हैं।
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: BJP ने इसे “जनविरोधी” और “मनमाना” निर्णय बताया।
- चेतावनी: फैसला वापस न लेने पर आंदोलन की तैयारी।
- वर्तमान स्थिति: मामला गरमाया, राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग।
