धरना और समर्थन जारी: प्रयागराज में संत समाज का आंदोलन तेज
प्रयागराज माघ मेले के बाहर उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना लगातार 10वें दिन भी जारी है। संत समाज के इस आंदोलन को अब और व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है।
इसी क्रम में कंप्यूटर बाबा के नेतृत्व में कई संतों ने धूनी तपस्या और विरोध अनुष्ठान कर प्रशासन के रवैये पर कड़ा सवाल उठाया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में संत, अनुयायी और समर्थक मौजूद रहे, जिससे पूरे इलाके में धार्मिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।
धूनी तपस्या के जरिए जताया गया विरोध
संतों ने पारंपरिक तरीके से धूनी जलाकर तपस्या की और इसे शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ विरोध का प्रतीक बताया।
कंप्यूटर बाबा ने इस दौरान कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि सनातन धर्म और संत समाज के सम्मान की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया संत समाज के प्रति उपेक्षापूर्ण है और बार-बार संवाद की कोशिशों के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।
प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
धरना स्थल से संतों ने आरोप लगाया कि:
- सनातन धर्म का अपमान किया जा रहा है
- संतों की भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है
- संवाद के बजाय दबाव की नीति अपनाई जा रही है
- धार्मिक परंपराओं की अनदेखी हो रही है
संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
धरना स्थल पर क्या है माहौल ?
धरना स्थल पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, लेकिन लगातार बढ़ रही भीड़ और समर्थन से प्रशासन भी सतर्क है।
श्रद्धालु और स्थानीय लोग संतों के आंदोलन को नैतिक समर्थन दे रहे हैं, जबकि कई सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन की घोषणा की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
अब तक प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे क्या हो सकता है?
संत समाज ने संकेत दिए हैं कि:
- मांगें पूरी नहीं होने तक धरना जारी रहेगा
- आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है
- शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखा जाएगा
साथ ही उन्होंने सरकार से सीधी बातचीत की मांग भी दोहराई है।
Fact Check (तथ्य जांच)
✔️ धरना 10वें दिन भी जारी है
✔️ धूनी तपस्या कंप्यूटर बाबा के नेतृत्व में की गई
✔️ प्रशासन पर लगाए गए आरोप संत समाज के बयान हैं
✔️ प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी बाकी है
