संक्षिप्त विवरण: उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर माघ मेले के दौरान प्रशासन के साथ हुए विवाद के बाद सियासत तेज हो गई है। विरोधी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को BJP के खिलाफ घेरने की कोशिश की है, जिससे बीजेपी के भीतर मतभेद और फूट जैसी खबरें सामने आई हैं।
लखनऊ/प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की राजनीति फिर से एक बड़े मुद्दे के कारण गरमा गई है। माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुए विवाद को लेकर अब समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे आरोप लगाए हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि इस विवाद से BJP की साख और एकसमानता में कमी आई है और पार्टी के भीतर मतभेद उभर रहे हैं।
इस मुद्दे की शुरुआत उस समय हुई जब माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने संगम के नो-व्हीकल ज़ोन पर जाने से रोका था, जिसके बाद संत और उनके अनुयायियों के बीच विवाद बढ़ गया। इसके बाद सपा और कांग्रेस नेता इस घटना को BJP सरकार की नीति और रवैये के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बनाकर उठा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि BJP सरकार ने संतों और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान नहीं किया और इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं ने भी इस मामले में BJP पर हमला करते हुए कहा कि सरकार सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं का अपमान कर रही है।
पार्टी नेताओं के बयानों के कारण यूपी में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और विपक्षी दलों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले वर्षों में चुनावी राजनीति पर असर डालेगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद ने BJP के भीतर मतभेद को उजागर किया है, जिससे पार्टी को विपक्षी रैलियों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थान: लखनऊ/प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
घटना-प्रसंग: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से राजनीतिक बयानबाज़ी
तारीख: फरवरी 2026
तथ्य जांच:
✔ सपा और कांग्रेस ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर BJP सरकार पर आरोप लगाए हैं।
✔ यह विवाद माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के साथ प्रशासन की कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ था।
✔ सपा और कांग्रेस ने इसे धार्मिक एवं राजनीतिक मुद्दा बनाकर BJP पर निशाना साधा है।
