कोच्चि (केरल)। दृष्टि शून्यता (Zero Percent Vision) के बावजूद थान्या नाथन ने केरल न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर दिखाया, एक ऐसा सपना जिसे बहुत ही कम लोग हासिल कर पाते हैं। उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और लक्ष्य-केन्द्रित तैयारी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है। यह खबर न केवल उनके असाधारण परीक्षण की कहानी है बल्कि लाखों छात्रों को प्रेरणा भी देती है।
थान्या नाथन, जिनकी दृष्टि क्षमता शून्य प्रतिशत है, ने हाल ही में केरल न्यायिक सेवा परीक्षा (Kerala Judiciary Exam) को सफलतापूर्वक पास किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि सभी चुनौतियों का सामना कर रहे छात्रों के लिए एक मिसाल है।
थान्या नाथन का जन्म से ही दृष्टिहीन (Visually Impaired) था और उनकी पढ़ाई-लिखाई के लिए शुरू से ही अतिरिक्त सहायता तथा कठिन परिश्रम की आवश्यकता रही। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा कंप्यूटर सपोर्ट और विशेष टूल्स की मदद से पूरी की।
न्यायिक सेवा परीक्षा करने का निर्णय उनके परिवार और मार्गदर्शकों के समर्थन से लिया गया। थान्या ने एक सुदृढ़ अध्ययन योजना तैयार की और हर विषय को गहराई से समझने पर जोर दिया। विशेष रूप से न्यायिक वैधानिक विषयों, संविधान और भारतीय विधि प्रणाली के अध्ययन पर उन्होंने ज़ोर दिया।
थान्या ने कहा कि शुरुआत में कई लोग उन्हें कमजोर मानते थे, लेकिन उन्होंने खुद को निरंतर प्रेरित रखा और कठिन परिश्रम किया। उन्होंने समय-प्रबंधन, करीब से नोट्स तैयार करना और ऑडियो आधारित संसाधनों का लाभ उठाना अपनी रणनीति बनाया।
थान्या की सफलता को कई शिक्षाविदों और समाज के लोगों ने सराहा है। उनका कहना है कि थान्या ने यह साबित किया है कि दृष्टि की कमी कोई बाधा नहीं बल्कि एक चुनौती है, जिसे सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत से पार किया जा सकता है।
केरल न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर थान्या नाथन ने न केवल स्वयं को एक न्यायिक अधिकारी बनाये जाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि उन सभी छात्रों को भी प्रेरित किया है जो किसी प्रकार की कठिनाई से जूझ रहे हैं।
तथ्य जांच
✔ थान्या नाथन ने केरल न्यायिक सेवा परीक्षा को पास किया है।
✔ उनकी नेत्रहीनता (Zero Percent Vision) के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की है।
✔ उनकी तैयारी में ऑडियो सामग्री और विशेष सहायता का उपयोग शामिल रहा।
✔ यह उपलब्धि समाज और विद्यार्थियों के बीच प्रेरणादायक रूप से देखी जा रही है।
