यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज POCSO एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, धार्मिक आयोजनों और गुरुकुल से जुड़े वातावरण में नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। अदालत के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, जिसमें मेडिकल परीक्षण, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान शामिल हैं।
मेडिकल रिपोर्ट में सामने आए संकेतों के बाद अब इस केस में आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई भी प्रस्तावित है, जिसमें मेडिकल रिपोर्ट अहम साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकती है।
दूसरी ओर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पहले ही निराधार बताते हुए कहा है कि कथित पीड़ित उनके गुरुकुल से जुड़े नहीं थे और पूरा मामला साजिश के तहत खड़ा किया गया है।
तथ्य जांच:
✔ झूंसी थाने में POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
✔ मेडिकल जांच में उत्पीड़न के संकेत मिलने की बात सामने आई है।
✔ मामले में अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया गया है।
✔ आरोपों को अविमुक्तेश्वरानंद ने साजिश बताते हुए खारिज किया है।
