CJI ने अदालत में कहा कि अगर पाठ्यक्रम में कोई विषय जोड़ा या हटाया जाता है, तो यह उचित प्रक्रिया और विशेषज्ञ समीक्षा के बाद होना चाहिए, नहीं तो छात्र, अभिभावक और समाज में भ्रम एवं असहमति की स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण सामग्री तैयार करने वाली संस्था को विविध दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना चाहिए।
यह विवाद उस अध्याय को लेकर उठा है जिसे कुछ समूहों ने असमंजसित, पक्षपातपूर्ण और असंगत बताया है। CJI का कहना था कि इस तरह की सामग्री से विषय का सही सीखने और विद्यार्थियों की समझ प्रभावित हो सकती है। उन्होंने NCERT और सम्बंधित शैक्षिक बोर्ड को समीक्षा और स्पष्टता बढ़ाने के लिए कहा।
शिक्षा विशेषज्ञों और पाठ्यक्रम निर्माताओं के अनुसार, पाठ्यपुस्तक को सभी समुदायों और ऐतिहासिक संदर्भों के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है, ताकि पाठ्य सामग्री छात्रों के लिए संतुलित, तथ्यपरक और समग्र समझ प्रदान करे।
तथ्य जांच:
✔ CJI सूर्यकांत ने NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में शामिल विवादित अध्याय पर संतोषजनक प्रक्रिया का अभाव बताया।
✔ उन्होंने कहा कि इससे उन्हें ठेस पहुँची है।
✔ CJI ने पाठ्यक्रम विकास में विशेषज्ञ समीक्षा और विविध दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
