मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के कारण अमेरिका ने अपनी ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का फैसला किया है, जबकि पहले इसी मुद्दे पर भारत पर सख्त आर्थिक दबाव बनाया गया था।
कुछ समय पहले तक ट्रंप प्रशासन भारत के रूस से तेल आयात पर नाराज था। इसी वजह से अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया। अमेरिका का तर्क था कि रूस से तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध में रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
लेकिन अब हालात बदल गए हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संकट के कारण दुनिया में तेल की कमी और कीमतों में तेजी का खतरा पैदा हो गया है।
इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना बताया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत दुनिया के बड़े तेल उपभोक्ताओं और रिफाइनिंग देशों में से एक है, इसलिए उसकी खरीदारी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह छूट केवल अस्थायी कदम है और मुख्य रूप से उन तेल टैंकरों के लिए है जो पहले से समुद्र में थे।
तथ्य जाँच
- अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट देकर रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है।
- पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% से बढ़ाकर 50% तक टैरिफ लगाया था।
- यह दबाव रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लगाया गया था।
- मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है।
- वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने नीति में बदलाव किया।
- भारत दुनिया के बड़े तेल उपभोक्ताओं और रिफाइनिंग केंद्रों में से एक है।
- यह छूट सीमित अवधि के लिए है और केवल तत्काल सप्लाई संकट को संभालने के लिए दी गई है।
