मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में बड़ा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला। बैठक में अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों का रूस और चीन के साथ तीखा विवाद हो गया।
अमेरिका ने बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई और कहा कि तेहरान की गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि रूस और चीन ईरान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रतिबंधों की निगरानी को कमजोर कर रहे हैं।
अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में उस समिति (1737 कमेटी) के काम को जारी रखने पर जोर दिया, जो ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों और हथियारों से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करती है। इस प्रस्ताव पर मतदान में 11 देशों ने समर्थन किया, जबकि रूस और चीन ने विरोध किया और दो देशों ने मतदान से दूरी बनाई।
रूस और चीन का क्या कहना है
रूस और चीन ने अमेरिका की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ कड़े कदम और सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। दोनों देशों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि राजनयिक बातचीत से होना चाहिए।
युद्ध के कारण बढ़ा तनाव
फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसके बाद ईरान ने भी कई जगहों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा और बढ़ गया।
तथ्य जाँच
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बहस हुई।
- अमेरिका और उसके सहयोगियों का रूस और चीन से टकराव हुआ।
- अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी जारी रखने की मांग की।
- मतदान में 11 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि रूस और चीन ने विरोध किया।
- रूस और चीन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई से संकट और बढ़ेगा।
- फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल के हमलों के बाद ईरान युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
- UN में इस मुद्दे पर वैश्विक शक्तियों के बीच गहरा कूटनीतिक विभाजन दिखा।
