लोकसभा में एपस्टीन फाइल्स विवाद: राहुल गांधी के आरोपों पर हरदीप सिंह पुरी ने किया पलटवार


लोकसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘एपस्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठाया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और कारोबारी अनिल अंबानी का नाम जोड़ा। इसके जवाब में हरदीप सिंह पुरी ने आरोपों को बेआधार और निराधार बताया और स्पष्ट किया कि उनके एपस्टीन से मिलना पेशेवर रूप से हुआ था, अपराधों से नहीं जुड़ा। पढ़िए पूरी खबर

नई दिल्ली। लोकसभा के बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के पास ऐसे दस्तावेज़ हैं जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और व्यवसायी अनिल अंबानी का नाम उल्लेखित है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि उन दोनों को एपस्टीन से किसने मिलवाया और आरोप लगाया कि बड़े नामों को न्यायिक कार्रवाई से बचाया गया।

राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास डाटा है और वे प्रमाणित कर सकते हैं कि इन नामों का एपस्टीन फाइल्स में ज़िक्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पर सीधे दबाव है और यह सब बिना बाहरी दबाव के संभव नहीं है।

इन आरोपों के जवाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राहुल गांधी को बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है और यह आरोप निराधार हैं। पुरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से केवल अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में पेशेवर मुलाकातें की थीं और इसका अपराध से कोई संबंध नहीं है।

पुरी ने कहा कि मुलाकातें 2009 में न्यूयॉर्क में हुई थीं जब वे भारत के राजदूत थे और यह केवल प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुआ था। उन्होंने राहुल गांधी को भेजे गए नोट्स में भी सभी तथ्य पहले ही बताए थे।

पुरी ने कहा कि आरोपों का कोई आधार नहीं है और उन्होंने राहुल गांधी से किसी भी संदर्भ को साबित करने के लिए तथ्यों के साथ पेश होने का आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में भाषण के बाद चले गए, जो संसदीय प्रक्रिया का सम्मान नहीं है।

तथ्य जांच

राहुल गांधी ने लोकसभा में एपस्टीन फाइल्स का जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने बड़े नामों के जुड़े होने का दावा किया।
हरदीप सिंह पुरी ने आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया और स्पष्ट किया कि उनके एपस्टीन से संपर्क पेशेवर रहा।
एपस्टीन फाइल्स में नाम का होना किसी व्यक्ति को अपराधी साबित नहीं करता, यह केवल दस्तावेज़ों का हिस्सा हो सकता है; अलग से जांच और प्रामाणिकता आवश्यक होती है। 

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने