प्रयागराज / संभल - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2024 संभल हिंसा मामले में तत्कालीन एएसपी और अब फिरोजाबाद में तैनात अनुज चौधरी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट द्वारा 9 जनवरी 2026 को जारी किए गए FIR के आदेश के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर अंतरिम स्टे (Interim Stay) जारी रखा है। हाईकोर्ट ने अभी भी जांच और सुनवाई जारी रखने का निर्णय किया है। यह स्थिति संभल हिंसा के विवादित मामले में कानूनी प्रक्रिया के अगले कदमों का संदेश देती है।
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास उभरी हिंसा के प्रसंग में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन Circle Officer (सीओ) और अब फिरोजाबाद में एएसपी रह चुके अनुज चौधरी सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आज हाईकोर्ट ने इन दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए FIR के आदेश पर अंतरिम स्टे जारी रखने का निर्णय किया है। इसका मतलब है कि बताए गए आदेश अभी तक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना है और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद आगे का निर्णय आएगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनिष गोयल ने कहा कि सीजेएम का आदेश आपराधिक प्रक्रिया के नियम और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए लिया गया है और सार्वजनिक सेवकों को क्या सुरक्षा देखनी चाहिए इस पर कानूनी बहस हो रही है।
इस प्रकरण की जड़ 24 नवंबर 2024 की हिंसा घटना है, जहाँ मस्जिद सर्वे के दौरान उभरी वैवाहिक और धार्मिक तानाशाही ने हताहतों और घायलों को जन्म दिया। यही घटना अलम नामक युवा को गोली लगने का बयान जारी करने का विषय बना और उसके पिता यामीन ने सीजेएम के पास अर्जी दर्ज करवाई जिसके आधार पर FIR का आदेश जारी किया गया।
अब सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इस बात का निर्णय देगा कि क्या CJM का आदेश कानूनी रूप से सही था या फिर उसे रद्द किया जाए। यह मामला संभल और पुलिस कार्रवाइयों की जांच के प्रभावों को ले कर कानूनी पर्यवेक्षण का एक प्रभावशाली मिसाल बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास उभरी हिंसा के प्रसंग में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन Circle Officer (सीओ) और अब फिरोजाबाद में एएसपी रह चुके अनुज चौधरी सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आज हाईकोर्ट ने इन दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए FIR के आदेश पर अंतरिम स्टे जारी रखने का निर्णय किया है। इसका मतलब है कि बताए गए आदेश अभी तक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना है और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद आगे का निर्णय आएगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनिष गोयल ने कहा कि सीजेएम का आदेश आपराधिक प्रक्रिया के नियम और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए लिया गया है और सार्वजनिक सेवकों को क्या सुरक्षा देखनी चाहिए इस पर कानूनी बहस हो रही है।
इस प्रकरण की जड़ 24 नवंबर 2024 की हिंसा घटना है, जहाँ मस्जिद सर्वे के दौरान उभरी वैवाहिक और धार्मिक तानाशाही ने हताहतों और घायलों को जन्म दिया। यही घटना अलम नामक युवा को गोली लगने का बयान जारी करने का विषय बना और उसके पिता यामीन ने सीजेएम के पास अर्जी दर्ज करवाई जिसके आधार पर FIR का आदेश जारी किया गया।
अब सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इस बात का निर्णय देगा कि क्या CJM का आदेश कानूनी रूप से सही था या फिर उसे रद्द किया जाए। यह मामला संभल और पुलिस कार्रवाइयों की जांच के प्रभावों को ले कर कानूनी पर्यवेक्षण का एक प्रभावशाली मिसाल बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास उभरी हिंसा के प्रसंग में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन Circle Officer (सीओ) और अब फिरोजाबाद में एएसपी रह चुके अनुज चौधरी सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आज हाईकोर्ट ने इन दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए FIR के आदेश पर अंतरिम स्टे जारी रखने का निर्णय किया है। इसका मतलब है कि बताए गए आदेश अभी तक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना है और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद आगे का निर्णय आएगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनिष गोयल ने कहा कि सीजेएम का आदेश आपराधिक प्रक्रिया के नियम और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए लिया गया है और सार्वजनिक सेवकों को क्या सुरक्षा देखनी चाहिए इस पर कानूनी बहस हो रही है।
इस प्रकरण की जड़ 24 नवंबर 2024 की हिंसा घटना है, जहाँ मस्जिद सर्वे के दौरान उभरी वैवाहिक और धार्मिक तानाशाही ने हताहतों और घायलों को जन्म दिया। यही घटना अलम नामक युवा को गोली लगने का बयान जारी करने का विषय बना और उसके पिता यामीन ने सीजेएम के पास अर्जी दर्ज करवाई जिसके आधार पर FIR का आदेश जारी किया गया।
अब सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इस बात का निर्णय देगा कि क्या CJM का आदेश कानूनी रूप से सही था या फिर उसे रद्द किया जाए। यह मामला संभल और पुलिस कार्रवाइयों की जांच के प्रभावों को ले कर कानूनी पर्यवेक्षण का एक प्रभावशाली मिसाल बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास उभरी हिंसा के प्रसंग में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन Circle Officer (सीओ) और अब फिरोजाबाद में एएसपी रह चुके अनुज चौधरी सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आज हाईकोर्ट ने इन दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए FIR के आदेश पर अंतरिम स्टे जारी रखने का निर्णय किया है। इसका मतलब है कि बताए गए आदेश अभी तक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना है और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद आगे का निर्णय आएगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनिष गोयल ने कहा कि सीजेएम का आदेश आपराधिक प्रक्रिया के नियम और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए लिया गया है और सार्वजनिक सेवकों को क्या सुरक्षा देखनी चाहिए इस पर कानूनी बहस हो रही है।
इस प्रकरण की जड़ 24 नवंबर 2024 की हिंसा घटना है, जहाँ मस्जिद सर्वे के दौरान उभरी वैवाहिक और धार्मिक तानाशाही ने हताहतों और घायलों को जन्म दिया। यही घटना अलम नामक युवा को गोली लगने का बयान जारी करने का विषय बना और उसके पिता यामीन ने सीजेएम के पास अर्जी दर्ज करवाई जिसके आधार पर FIR का आदेश जारी किया गया।
अब सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इस बात का निर्णय देगा कि क्या CJM का आदेश कानूनी रूप से सही था या फिर उसे रद्द किया जाए। यह मामला संभल और पुलिस कार्रवाइयों की जांच के प्रभावों को ले कर कानूनी पर्यवेक्षण का एक प्रभावशाली मिसाल बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास उभरी हिंसा के प्रसंग में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन Circle Officer (सीओ) और अब फिरोजाबाद में एएसपी रह चुके अनुज चौधरी सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आज हाईकोर्ट ने इन दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए FIR के आदेश पर अंतरिम स्टे जारी रखने का निर्णय किया है। इसका मतलब है कि बताए गए आदेश अभी तक कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना है और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद आगे का निर्णय आएगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनिष गोयल ने कहा कि सीजेएम का आदेश आपराधिक प्रक्रिया के नियम और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए लिया गया है और सार्वजनिक सेवकों को क्या सुरक्षा देखनी चाहिए इस पर कानूनी बहस हो रही है।
इस प्रकरण की जड़ 24 नवंबर 2024 की हिंसा घटना है, जहाँ मस्जिद सर्वे के दौरान उभरी वैवाहिक और धार्मिक तानाशाही ने हताहतों और घायलों को जन्म दिया। यही घटना अलम नामक युवा को गोली लगने का बयान जारी करने का विषय बना और उसके पिता यामीन ने सीजेएम के पास अर्जी दर्ज करवाई जिसके आधार पर FIR का आदेश जारी किया गया।
अब सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इस बात का निर्णय देगा कि क्या CJM का आदेश कानूनी रूप से सही था या फिर उसे रद्द किया जाए। यह मामला संभल और पुलिस कार्रवाइयों की जांच के प्रभावों को ले कर कानूनी पर्यवेक्षण का एक प्रभावशाली मिसाल बन चुका है।
तथ्य जांच
✔ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुज चौधरी और सरकार द्वारा FIR आदेश के खिलाफ़ दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखते हुए अंतरिम स्टे जारी किया।
✔ यह FIR आदेश 24 नवंबर 2024 की संभल हिंसा से जुड़ा हुआ है, जहां एक युवक को गोली लगने का आरोप थेला गया।
✔ यूपी सरकार और अनुज चौधरी ने सीजेएम के आदेश को चुनौती दी है।
✔ सरकार का कहना है कि गोलीबारी पुलिस द्वारा नहीं की गई थी और आदेश लागू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जाना चाहिए।
