कानपुर के हाई-प्रोफाइल लैंबोर्गिनी एक्सीडेंट केस में आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट ने बेल दे दी है और पुलिस की रिमांड मांग को खारिज कर दिया। बेल पर रिलीज़ होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। पढ़िए पूरा अपडेट, कोर्ट का फैसला और वकील का पक्ष।
कानपुर। वीआईपी रोड पर 8 फ़रवरी को लैंबोर्गिनी कार के तेज़ रफ्तार में दुर्घटना के मामले में आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट ने बेल (जमानत) दे दी है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा रिमांड (जांच-पाज़ी) की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि वे उसे ₹20,000 पर्सनल बॉन्ड + ₹20,000 अंडरटेकिंग पर बेल पर रिहा करेंगे।
शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटे बाद बेल मिल गई, जिससे मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। पुलिस ने पहले रिमांड की मांग की थी ताकि वे उसे विस्तृत पूछ-ताछ के लिए हिरासत में रख सकें, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
उनके वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि शिवम को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था और पुलिस सरकारी दबाव में काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास मामले के लिए ठोस सबूत नहीं थे, और इसी वजह से कोर्ट ने रिमांड देने से इनकार किया।
यह दुर्घटना तब हुई जब लैंबोर्गिनी कार ने ऑटो, बुलेट तथा अन्य वाहनों को टक्कर मारी थी जिससे कई लोग घायल हुए थे और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए थे। हादसे के चार दिन बाद पुलिस ने मिश्रा को गिरफ्तार किया था, लेकिन कोर्ट ने रिमांड न देने का फ़ैसला सुनाया।
तथ्य जांच
✔ कोर्ट ने शिवम मिश्रा को बेल दी है और उसके लिए ₹20,000 पर्सनल बॉन्ड तय किया है।
✔ पुलिस की रिमांड याचिका अदालत ने खारिज कर दी है।
✔ मामले में जांच अभी जारी है और बेल का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है - साफ़ सबूत न होने पर कोर्ट ने रिमांड न देने का फ़ैसला दिया।
✔ वकील की दलील के मुताबिक गलत गिरफ्तारी का दावा किया गया है, जो जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
