उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की योजना है कि मदरसों को संबंधित जिलों के राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध (अफिलिएट) किया जाए, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त डिग्री मिल सके।
प्रस्ताव के अनुसार मदरसा शिक्षा परिषद की कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) कक्षाओं की परीक्षाएं अब संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित कराई जाएंगी। सफल छात्रों को उसी विश्वविद्यालय से डिग्री प्रदान की जाएगी, जिससे मदरसा संबद्ध होगा।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 में संशोधन करने जा रही है। संशोधन लागू होने के बाद मदरसों को उसी जिले के विश्वविद्यालय से जोड़ा जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे कॉलेज विश्वविद्यालय से संबद्ध होते हैं।
सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय से डिग्री मिलने पर मदरसा छात्रों को देश-विदेश में उच्च शिक्षा, रोजगार और अन्य शैक्षणिक अवसरों में ज्यादा मान्यता मिलेगी। अभी कई मामलों में मदरसा डिग्रियों को व्यापक मान्यता नहीं मिल पाती।
इस प्रस्ताव को उच्च शिक्षा विभाग ने तैयार कर लिया है। अंतिम जांच के बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा, फिर कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस पर आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा।
इस मुद्दे पर मंत्री संजय निषाद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था संविधान के अनुरूप होनी चाहिए और सभी के लिए समान कानून और शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए।
तथ्य जाँच
- उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों को विश्वविद्यालयों से जोड़ने की योजना बना रही है।
- इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 में संशोधन प्रस्तावित है।
- मदरसा की कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) परीक्षाएं विश्वविद्यालय कराएंगे।
- सफल छात्रों को डिग्री संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा दी जाएगी।
- इस बदलाव का उद्देश्य मदरसा छात्रों को मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर देना है।
- प्रस्ताव पहले उच्च शिक्षा विभाग से होकर सरकार और फिर कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा।
- सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उच्च शिक्षा की डिग्री देने का अधिकार विश्वविद्यालयों को ही है, मदरसा बोर्ड को नहीं।
