मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने इस सैन्य अभियान के पीछे की रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह अभियान पहले से तय तीन प्रमुख लक्ष्यों के आधार पर चल रहा है।
अजार के अनुसार इस युद्ध में “नो शिफ्टिंग ऑफ द गोलपोस्ट्स” की नीति अपनाई गई है, यानी अभियान के लक्ष्य तय हैं और उनमें बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इजरायल और उसके सहयोगी देश उसी योजना के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं।
इजरायली राजदूत ने कहा कि इस अभियान का पहला उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न खतरे को निष्क्रिय करना है। इजरायल लंबे समय से दावा करता रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
दूसरा लक्ष्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करना है। इजरायल का कहना है कि ईरान के पास बड़ी संख्या में लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन सकती हैं।
तीसरा उद्देश्य ईरान की सैन्य और दमनकारी क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है, ताकि भविष्य में ईरान ऐसे कार्यक्रम फिर से खड़े न कर सके और वहां की जनता अपने भविष्य का फैसला स्वयं कर सके।
इस बीच क्षेत्र में युद्ध का दायरा भी बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण मध्य-पूर्व के कई देशों में तनाव बढ़ गया है और संघर्ष के लंबे समय तक चलने की आशंका जताई जा रही है।
तथ्य जाँच
- बयान देने वाले: भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार।
- मुख्य रणनीति: ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तीन लक्ष्यों पर आधारित।
- पहला लक्ष्य: ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा खतरे को खत्म करना।
- दूसरा लक्ष्य: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करना।
- तीसरा लक्ष्य: ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर करना और शासन की आक्रामक ताकत घटाना।
- सैन्य अभियान: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे।
- वर्तमान स्थिति: मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
