दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (9 मार्च 2026) को बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस CBI की याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने सभी पक्षों से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 तय की है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि इस मामले में जल्द सुनवाई की जाए क्योंकि यह एक गंभीर मामला है। वहीं अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह निचली अदालत द्वारा CBI अधिकारियों पर की गई कुछ टिप्पणियों पर रोक लगा सकती है।
CBI का दावा है कि दिल्ली की 2021-22 आबकारी नीति तैयार करने और लागू करने के दौरान साजिश और भ्रष्टाचार हुआ तथा कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपमुक्त करते समय उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया।
गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका, जिसके बाद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
अब इस मामले में सभी की नजर 16 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
तथ्य जाँच
- मामला: दिल्ली सरकार की 2021-22 आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा विवाद।
- मुख्य आरोपी: अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित कई अन्य लोग।
- आरोप: नीति बनाने और लागू करने में कथित भ्रष्टाचार और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप।
- निचली अदालत का फैसला: 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण आरोपियों को आरोपमुक्त किया।
- CBI की कार्रवाई: निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
- हाईकोर्ट का आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा।
- अगली सुनवाई: अदालत ने मामले की अगली तारीख 16 मार्च 2026 तय की है।
- सरकार का पक्ष: केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जल्द सुनवाई की मांग की।
- संभावित अगला कदम: हाईकोर्ट में जवाब दाखिल होने के बाद अदालत तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था या नहीं।
