मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर परमाणु हथियारों का उपयोग हुआ तो दुनिया को सिर्फ विस्फोटों से ही नहीं बल्कि उसके बाद आने वाले “न्यूक्लियर विंटर” से भी भारी नुकसान होगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार न्यूक्लियर युद्ध के दौरान होने वाले विस्फोटों से बड़ी मात्रा में धुआं और कालिख वायुमंडल में पहुंच जाएगी, जिससे सूर्य की रोशनी धरती तक नहीं पहुंचेगी और वैश्विक तापमान तेजी से गिर सकता है। इस स्थिति को न्यूक्लियर विंटर कहा जाता है। इससे दुनिया भर में खेती लगभग ठप हो सकती है और भोजन की भारी कमी पैदा हो सकती है।
एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार ऐसे हालात में दुनिया के अधिकांश देशों में खाद्य उत्पादन 80-90% तक गिर सकता है। इससे अरबों लोगों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो सकता है।
किन देशों के बचने की संभावना सबसे ज्यादा
वैज्ञानिकों की कुछ रिसर्च के अनुसार ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ऐसे देश हैं जिनके बचने की संभावना सबसे अधिक बताई गई है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- इन देशों की भौगोलिक दूरी बड़े सैन्य टकराव वाले क्षेत्रों से काफी ज्यादा है।
- इनके पास मजबूत कृषि व्यवस्था है, जिससे सीमित परिस्थितियों में भी भोजन उत्पादन संभव हो सकता है।
- चारों ओर समुद्र होने के कारण यहां जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इन देशों में भी जीवन आसान नहीं होगा और लोगों को भोजन की कमी, रेडिएशन और कठोर मौसम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
क्या भारत सुरक्षित रहेगा ?
रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों के बचने की संभावना अधिक बताई गई है, उनमें भारत का नाम शामिल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े परमाणु युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर खेती और खाद्य उत्पादन पर भारी असर पड़ेगा, जिससे भारत सहित कई बड़े देशों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
तथ्य जाँच
- मुद्दा: संभावित तीसरे विश्व युद्ध और न्यूक्लियर विंटर का खतरा।
- न्यूक्लियर विंटर क्या है: परमाणु विस्फोटों से उठने वाली कालिख सूर्य की रोशनी रोक देती है और धरती का तापमान गिर जाता है।
- प्रभाव: वैश्विक स्तर पर खेती और खाद्य उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
- सबसे सुरक्षित माने गए देश: ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड।
- मुख्य कारण: भौगोलिक दूरी, मजबूत कृषि प्रणाली और समुद्री सुरक्षा।
- वैश्विक खतरा: अरबों लोगों को भोजन की कमी और जलवायु संकट का सामना करना पड़ सकता है।
- भारत की स्थिति: उपलब्ध रिसर्च के अनुसार सुरक्षित देशों की सूची में भारत शामिल नहीं है।
